शिमला शहर में पानी का संकट ,शिमल नागरिक सभा हुई मुखर, डीसी ऑफिस के बाहर किया प्रदर्शन, जल निगम कंपनी को बन्द करने की उठाई मांग


शिमला शहर में पानी का संकट ,शिमल नागरिक सभा हुई मुखर, डीसी ऑफिस के बाहर किया प्रदर्शन, जल निगम कंपनी को बन्द करने की उठाई मांग

गर्मियों के बाद अब बरसात के मौसम में भी शिमला में पानी का संकट गहराया हुआ है पेयजल परियोजनाओं में गाद के चलते पानी की सप्लाई हर रोज जल निगम नहीं कर पा रहा है। शहर के कई क्षेत्रों में लोगों को तीसरे दिन पानी मिल रहा है वहीं पानी न मिलने पर शिमला नागरिक सभा मुखर हो गई है और शुक्रवार को डीसी ऑफिस के बाहर धरना प्रदर्शन कर जल निगम पर लोगों को समय पर पानी ना उपलब्ध करवाने के आरोप लगाए

शिमला नागरिक सभा के संयोजक संजय चौहान ने कहा कि शिमला शहर में गर्मियों के बाद अब बरसात में भी पानी का संकट गहराया हुआ है जल निगम पूरी तरह से लोगों को पानी मुहैया करवाने में नाकाम साबित हो रहा है   नागरिक सभा मांग कर रही है सरकार तुरंत इस कंपनी को बंद करें और यह जो पेयजल व्यवस्था है उसे नगर निगम के अधीन करें। उन्होंने कहा कि पेयजल व्यवस्था का काम संविधान के तहत नगर निगम के अधीन है ऐसे में सरकार तुरंत इस कार्य करें शहर में नियमित आपूर्ति पानी की नहीं हो रही है।  जबकि 35 से 48 एमएलडी तक पानी हर रोज मिल रहा है उसके बावजूद गर्मी का मौसम सर्दी का मौसम हो या फिर बरसात  का। शहर में तीसरे दिन पानी की राशनिंग की गई है कई क्षेत्रों में 4 से 6 दिनों बाद पानी मिल रहा है और पानी की  कोई समय सारणी नहीं है कभी रात में आता है कभी दोपहर में ऐसे में कर्मचारियों और जो सुबह निकलने वाले लोग हैं उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है । 

पूर्व नगर निगम द्वारा परियोजनाएं जो चला जा रही थी जिस प्रकार 65 एमएलडी तक पानी लाने की परियोजना थी इसके अलावा सीवरेज और पेयजल व्यवस्था के सुधार हेतु विश्व बैंक से 125 करोड़ मिलियन डॉलर की योजना स्वीकृत करवाई थी वह पिछले 5 वर्षों में जमीनों पर नहीं उतारी गई है इसका मुख्य कारण है कि सरकार निजी करण की व्यवस्था चला रही है । उन्होंने कहा कि सरकार हर रोज शहर वासियों को पानी मुहैया करवाये ओर  सरकार जल निगम कम्पनी को बन्द कर पानी का जिम्मा नगर निगम को सौंपे।

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