महामहिम राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने किया बंदियों के लिए सात नई योजनाओं का शुभारम्भ।

महामहिम राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने किया बंदियों के लिए सात नई योजनाओं का शुभारम्भ।

राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने आज शिमला के निकट मॉडल केंद्रीय कारागार, कंडा में कारागार एवं सुधार सेवाएं विभाग, हिमाचल प्रदेश द्वारा बंदियों के लिए सात नई योजनाओं के शुभारम्भ किया। इनमें ध्यान कार्यक्रम, टेलीमेडिसन परियोजना, वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम, अपशिष्ट प्रबंधन, निःशुल्क ऑनलाईन कोचिंग, ऑडियो लाइब्रेरी तथा कविता संग्रह ‘परवाज़’ का विमोचन शामिल है।
इस अवसर पर, राज्यपाल ने कहा कि उनके लिए यह भावुक क्षण हैं कि वे बंदियों के बीच आकर उनके कौशल को देख पाए हैं। उन्होंने अतिरिक्त पुलिस महानिदेश, कारागार एवं सुवधार सेवाएं श्रीमती सतवंत अटवाल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से कारागार कैसे सुधार गृह में परिवर्तित हुआ है। उन्होंने कहा कि बंदियों के भी विचार और भावनाएं होती हैं। जिस कारण वे यहां पहुंचे वह दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन, उनका समय यहीं समाप्त नहीं हो जाता है। उनके लिए भविष्य की नई उम्मीदें राह देख रही है।
श्री आर्लेकर ने सभी बंदियों से अपील की कि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनें। यहां आने का कारण कुछ भी रहा हो लेकिन वे यहां सीखें, प्रयोग करें, प्रशिक्षण प्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्राप्त करें और सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि यह सुधारगृह है इसलिए विभिन्न कार्यक्रम बंदियों के लिए चलाए जा रहे हैं। उन्हांेने कहा कि इन कार्यक्रमों को अपनाने से उन्हें तो फायदा होगा ही समाज के हित में भी है।


राज्यपाल बंदियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम देखकर प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुशलता का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि हर कार्य वे स्वयं से शुरू करें।
इससे पूर्व, राज्यपाल ने ट्रांसेंडैंटल मेडिटेशन कार्यक्रम एवं प्रशिक्षण का शुभारम्भ किया, जिसे ट्रांसेंडैंटल मेडिटेशन संस्था द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से ई-संजीवनी द्वारा कारागारों में टेलीमेडिसन कार्यक्रम का शुभारम्भ भी किया। इस कार्यक्रम में बंदियों को विशेषज्ञ चिकित्सक ऑनलाई परामर्श देंगे। उन्होंने रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया के सहयोग से बंदियों के लिए वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम का शुभारम्भ भी किया। कारागार विभाग ने वेस्ट वॉरियर्स सोसायटी धर्मशाला के साथ मिलकर अपशिष्ट प्रबंधन के लिए ‘वेस्ट अंडर अरेस्ट प्रोग्राम’ के तहत एक वेस्ट मेनेजमैंट यूनिट धर्मशाला में स्थापित किया है। ऐसे इकाइयां प्रदेश के अन्य सभी जेलों में भी संचालित की जाएंगी। इन इकाइयों में दो तरफा रणनीति रहेगी। बंदियों को वेस्ट को सैगरीगेट करना सिखाया जाएगा और दूसरे उन्हें वेस्ट अपसाइकलिंग टेक्नीक जैसे ग्रीन वेस्ट से वर्मीकंपोस्ट और टेटरा पैक से बोर्ड बनाना सीखाया जाएगा। सोसायटी के सहयोग से अपशिष्ट प्रबंधन का भी राज्यपाल ने शुभारम्भ किया। उन्होंने बंदियों के बच्चों के लिए स्माईल फाउंडेशन के साहयोग से फ्री ऑनलाईन कोचिंग का शुभारम्भ किया। जो बंदी पुस्तकें पढ़ नहीं सकते हैं तथा समय के आभाव के कारण नहीं पाते उनके लिए आडियो लाइब्रेरी का शुभारम्भ भीकिया गया।


इसके पश्चात, राज्यपाल ने कंडा कारागार में पौधा भी रोपा। उन्होंने विभिन्न इकाइयों का निरीक्षण भी किया जहां बंदी विभिन्न उत्पाद तैयार कर रहे हैं।
इस अवसर पर, अतिरिक्त पुलिस महानिदेश श्रीमती सतवंत अटवाल ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा कारागार एवं सुधार सेवाएं विभाग द्वारा कार्यान्वित विभिन्न गतिविधियों से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समस्त कारागारों में एक बैरक को मुक्त कारागार घोषित किया गया है। इनमें पात्र बंदिी कारागार से बाहर जाकर आजीविका कमा कर अपने परिवार का बेहतर पालन पोषण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेष देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जिसने पात्र महिला बंदियों का मुक्त कारागार की सुविधा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि देश के अन्य कारागारें हिमाचल का अनुसरण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थाओं ने इन कार्यों की सराहना की है और नौ अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कृत भी किया है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री अभिषेक त्रिवेदी, राज्यपाल के सचिव श्री राजेश शर्मा तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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