फीमेल हेल्थ वर्कर यूनियन का कहना “वाह रे मुख्यमंत्री कही महिलाओं का सम्मान तो कहीं पड़ी लिखी महिलाओं को छोड़ा सड़कों पर नारे लगाने के लिए”। सरकार को दी दो टूक चेतावनी यदि हमारी मांगें नहीं मानी तो विधानसभा चुनावों में होगा नोटा का इस्तेमाल।

फीमेल हेल्थ वर्कर यूनियन का कहना “वाह रे मुख्यमंत्री कही महिलाओं का सम्मान तो कहीं पड़ी लिखी महिलाओं को छोड़ा सड़कों पर नारे लगाने के लिए”। सरकार को दी दो टूक चेतावनी यदि हमारी मांगें नहीं मानी तो विधानसभा चुनावों में होगा नोटा का इस्तेमाल।

लगातार तीसरे दिन भी फीमेल हेल्थ वर्कर यूनियन का क्रमिक अनशन जारी। ए.एन.एम फीमेल हेल्थ वर्कर यूनियन की शिक्षित महिलाओं को राजनितिक पाठ पढ़ाने आई भाजपा महिला मोर्चा तथा फीमेल हेल्थ वर्कर का हंगामा बढ़ता देख उलटे पैर भागना पड़ा नीलम सरैइक।

शिमला : राजधानी शिमला के सीटीओ चौक पर उस समय असमंजस की स्थिति पैदा हो गई, जब गुड़िया प्रकरण को लेकर नारेबाजी कर रही महिला मोर्चा की नीतियों को फीमेल हेल्थ वर्कर ने घेर लिया. भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ता नीलम सरैइक की अगुवाई में हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के बयान का विरोध कर रही थी. तभी वहां 3 दिनों से क्रमिक अनशन पर बैठे फीमेल हेल्थ वर्कर पहुंच गई. इस दौरान हेल्थ वर्करों ने भाजपा नेताओं से रोजगार के बारे में सवाल पूछा. उन्होंने कहा कि बीते 20 सालों से सरकारी आती-जाती हैं, लेकिन एएनएम नर्सों के लिए कोई स्थाई नीति नहीं बनाई जाती. इस पर भाजपा नेता नीलम सरैइक ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन एएनएम नर्स मानो मन बना कर आई थी कि किसी भी हाल में भाजपा नेताओं को छोड़ने वाली नहीं हैं.

मौके पर हंगामा करते हुए एएनएम नर्स ने कहा कि अपने छोटे-छोटे बच्चों को छोड़कर शिमला में प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हैं. कोरोना काल में भी नर्सों ने पूरी मेहनत के साथ काम किया, लेकिन सरकार केवल आश्वासन ही देती है. बीते करीब 20 सालों से हेल्थ वर्कर स्थाई नीति की मांग कर रहे हैं लेकिन ना तो बीजेपी सरकार और ना ही कांग्रेस सरकार नीति बना रही है. हालांकि भारतीय जनता महिला मोर्चा की नीतियों ने हेल्थ वर्करों को आश्वासन दिया कि वे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के पास मांगों को लेकर जाएंगी और एनएम नर्सों के लिए स्थाई नीति बनाने की मांग करेंगे.

गौरतलब है कि साल के अंत में हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव में प्रदेश सरकार लगभग हर वर्ग को राहत देने का काम कर रही है. ऐसे में राहत की मांग कर रहे तमाम वर्ग यह चाहते हैं कि जल्द से जल्द सरकार उनके लिए भी नीति निर्माण करें. सरकार भी चुनावी साल में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. ऐसे में एएनएम फीमेल हेल्थ वर्करों को भी यह उम्मीद है कि सरकार जल्द ही उनके लिए कोई नीति बना देगी.

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